श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  13.149.35 
श्रुतवन्तो दयावन्त: शुचय: सत्यसंगरा:।
स्वैरर्थैै: परिसंतुष्टास्ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जो ज्ञानी, दयालु, शुद्ध, सत्यवादी और अपने धन से संतुष्ट हैं, वे स्वर्ग जाते हैं ॥ 35॥
 
Those who are knowledgeable, compassionate, pure, truthful and satisfied with their own wealth go to heaven. ॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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