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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन
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श्लोक 34
श्लोक
13.149.34
शत्रुं मित्रं च ये नित्यं तुल्येन मनसा नरा:।
भजन्ति मैत्रा: संगम्य ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ ३४॥
अनुवाद
जो सबसे मित्रतापूर्वक मिलते हैं तथा मित्र और शत्रुओं के साथ समान भाव रखते हैं, वे स्वर्ग को जाते हैं ॥ 34॥
Those who meet everyone with friendship and treat friends and enemies with the same heart, go to heaven. ॥ 34॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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