श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.149.31 
अरण्ये विजने न्यस्तं परस्वं दृश्यते यदा।
मनसापि न हिंसन्ति ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जब किसी दूसरे का धन निर्जन वन में पड़ा हुआ मिले, तब भी जो लोग उसके मोह में नहीं पड़ते और किसी को हानि नहीं पहुँचाते, वे स्वर्ग जाते हैं।
 
When another's wealth is found lying in a deserted forest, even then those who do not get tempted by it and do not harm anyone, go to heaven.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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