श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.149.3 
केन शीलेन वृत्तेन कर्मणा कीदृशेन वा।
समाचारैर्गुणै: कैर्वा स्वर्गं यान्तीह मानवा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! किस आचरण, व्यवहार, कर्म और किन गुणों से मनुष्य बंधते, मुक्त होते और स्वर्ग को जाते हैं॥3॥
 
Lord! By what conduct, behavior, action and by what virtues do people get bound, freed and go to heaven. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)