श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.149.29 
श्रीमहेश्वर उवाच
मानसेनेह धर्मेण संयुक्ता: पुरुषा: सदा।
स्वर्गं गच्छन्ति कल्याणि तन्मे कीर्तयत: शृणु॥ २९॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - कल्याणी! जो लोग सदैव मानसिक धर्म से युक्त रहते हैं, अर्थात् जो मन में धर्म का चिंतन और आचरण करते हैं, वे स्वर्ग को जाते हैं। इस विषय में मैं जो कुछ कहता हूँ, उसे सुनो।
 
Sri Maheshwar said - Kalyani! Those who are always endowed with mental Dharma, i.e. those who think and practise Dharma in their mind, go to heaven. Listen to what I tell you in this regard.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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