श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.149.25 
शठप्रलापाद् विरता विरुद्धपरिवर्जका:।
सौम्यप्रलापिनो नित्यं ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जिनके मुख से कभी बुरे शब्द नहीं निकलते, जो अपशब्दों का त्याग करते हैं और जो सदैव मधुर वाणी बोलते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं।
 
Those whose mouth never utters evil words, who renounce abusive language and who always speak softly, they go to heaven.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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