श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.149.23 
पिशुनां न प्रभाषन्ते मित्रभेदकरीं गिरम्।
ऋतं मैत्रं तु भाषन्ते ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जो लोग चुगली या चुगली नहीं करते और दो मित्रों के बीच दरार पैदा नहीं करते तथा सत्य और मित्रतापूर्ण भाषण करते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं।
 
Those who do not gossip or gossip and create rift between two friends and speak truth and friendship, go to heaven. 23.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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