| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन » श्लोक 21 |
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| | | | श्लोक 13.149.21  | श्लक्ष्णां वाणीं निराबाधां मधुरां पापवर्जिताम्।
स्वागतेनाभिभाषन्ते ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ २१॥ | | | | | | अनुवाद | | जो मधुर, निर्विघ्न, पापरहित और आतिथ्य से युक्त वाणी बोलते हैं, वे मनुष्य स्वर्ग में जाते हैं॥21॥ | | | | Those who speak smooth, sweet, free from obstacles, sinless and full of hospitality, go to human heaven. 21॥ | | ✨ ai-generated | | |
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