श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.149.19 
श्रीमहेश्वर उवाच
आत्महेतो: परार्थे वा नर्महास्याश्रयात् तथा।
ये मृषा न वदन्तीह ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - जो मनुष्य हँसी-मजाक की सहायता से भी अपने या दूसरों के लिए कभी झूठ नहीं बोलते, वे स्वर्ग जाते हैं॥19॥
 
Sri Maheshwar said - Those people who, even with the help of laughter and jokes, never tell a lie for themselves or others, go to heaven.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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