श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.149.18 
उमोवाच
वाचा तु बद्‍ध्यते येन मुच्यतेऽप्यथवा पुन:।
तानि कर्माणि मे देव वद भूतपतेऽनघ॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उमा ने पूछा - हे पापरहित भूतनाथ! महादेव! किस प्रकार की वाणी बोलने से अथवा उस वाणी द्वारा कौन-सा कर्म करने से मनुष्य बंधन में पड़ता है अथवा उस बंधन से मुक्त हो जाता है? उन वाचिक कर्मों का मुझसे वर्णन कीजिए।
 
Uman asked – Sinless Bhootnath! Mahadev! By speaking what kind of speech or by doing what action through that speech, a person falls into bondage or gets freed from that bondage? Describe those verbal actions to me.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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