Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.149.15-16h: यह देवताओं द्वारा निर्मित मार्ग है। राग-द्वेष दूर करने के लिए इस मार्ग का विकास किया गया है। अतः सामान्य मनुष्यों और विद्वानों को सदैव इसका अनुसरण करना चाहिए। ॥15 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एष देवकृतो मार्ग: सेवितव्य: सदा नरै:॥ १५॥
अकषायकृतश्चैव मार्ग: सेव्य: सदा बुधै:।
अनुवाद
यह देवताओं द्वारा निर्मित मार्ग है। राग-द्वेष दूर करने के लिए इस मार्ग का विकास किया गया है। अतः सामान्य मनुष्यों और विद्वानों को सदैव इसका अनुसरण करना चाहिए। ॥15 1/2॥
This is the path created by the gods. This path has been developed to remove attachment and hatred. Therefore, ordinary people and learned men should always follow it. ॥ 15 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥