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mahabharat 13.148.8: यदि कोई क्षत्रिय या वैश्य ब्राह्मण धर्म का पालन करता है और ब्राह्मण का पद ग्रहण करता है, तो वह ब्रह्मपद को प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.8 
स्थितो ब्राह्मणधर्मेण ब्राह्मण्यमुपजीवति।
क्षत्रियो वाथ वैश्यो वा ब्रह्मभूयं स गच्छति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई क्षत्रिय या वैश्य ब्राह्मण धर्म का पालन करता है और ब्राह्मण का पद ग्रहण करता है, तो वह ब्रह्मपद को प्राप्त करता है।
 
If a Kshatriya or a Vaishya follows the Brahminic religion and adopts the status of a Brahmin, then he attains the state of Brahman. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)