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mahabharat 13.148.6: श्री महेश्वर बोले- देवि! ब्राह्मणत्व दुर्लभ है। हे शुभे! मेरे मत में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र ये चार वर्ण स्वाभाविक (स्वाभाविक या स्वतःसिद्ध) हैं, ऐसा मेरा मत है।   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.6 
श्रीमहेश्वर उवाच
ब्राह्मण्यं देवि दुष्प्रापं निसर्गाद् ब्राह्मण: शुभे।
क्षत्रियो वैश्यशूद्रौ वा निसर्गादिति मे मति:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले- देवि! ब्राह्मणत्व दुर्लभ है। हे शुभे! मेरे मत में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र ये चार वर्ण स्वाभाविक (स्वाभाविक या स्वतःसिद्ध) हैं, ऐसा मेरा मत है।
 
Shri Maheshwar said- Goddess! Brahminhood is rare. O auspicious one! In my opinion, these four castes - Brahmin, Kshatriya, Vaishya and Shudra - are natural (natural or self-evident), this is my opinion. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)