Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.148.57: इस प्रकार जो ब्राह्मण सत्य मार्ग पर स्थित है, केवल सत्य मार्ग का ही अनुसरण करता है तथा अग्निहोत्र तथा स्वाध्याय करते हुए अपना जीवन व्यतीत करता है, वह ब्रह्मपद को प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  13.148.57 
एवंभूतो हि यो विप्र: सत्पथं सत्पथे स्थित:।
आहिताग्निरधीयानो ब्रह्मभूयाय कल्पते॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जो ब्राह्मण सत्य मार्ग पर स्थित है, केवल सत्य मार्ग का ही अनुसरण करता है तथा अग्निहोत्र तथा स्वाध्याय करते हुए अपना जीवन व्यतीत करता है, वह ब्रह्मपद को प्राप्त होता है।
 
Thus a Brahmin who is established on the right path, follows only the true path and spends his life performing Agnihotra and studying, attains the state of Brahman. 57.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)