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mahabharat 13.148.56: गृहस्थ ब्राह्मण को घर पर रहकर संहिता का पाठ तथा शास्त्रों का अध्ययन स्वयं ही करना चाहिए। उसे अध्ययन को जीविका का साधन नहीं बनाना चाहिए ॥ 56॥   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.56 
संहिताध्यायिना भाव्यं गृहे वै गृहमेधिना।
नित्यं स्वाध्यायिना भाव्यं न चाध्ययनजीविना॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
गृहस्थ ब्राह्मण को घर पर रहकर संहिता का पाठ तथा शास्त्रों का अध्ययन स्वयं ही करना चाहिए। उसे अध्ययन को जीविका का साधन नहीं बनाना चाहिए ॥ 56॥
 
A householder Brahmin should stay at home and recite the Samhita and study the scriptures on his own. He should not make study a means of livelihood. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)