Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.148.55: जो ब्राह्मण अपना कल्याण चाहता है, उसे सज्जनों के मार्ग का अनुसरण करना चाहिए और अतिथियों तथा भोजन कराने वालों को भोजन कराने के बाद ही स्वयं भोजन करना चाहिए। उसे वेदों द्वारा बताए गए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए और उत्तम आचरण करना चाहिए। ॥55॥ | mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विघसाशिना सदा भाव्यं सत्पथालम्बिना तथा।
ब्राह्मं हि मार्गमाक्रम्य वर्तितव्यं बुभूषता॥ ५५॥
अनुवाद
जो ब्राह्मण अपना कल्याण चाहता है, उसे सज्जनों के मार्ग का अनुसरण करना चाहिए और अतिथियों तथा भोजन कराने वालों को भोजन कराने के बाद ही स्वयं भोजन करना चाहिए। उसे वेदों द्वारा बताए गए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए और उत्तम आचरण करना चाहिए। ॥55॥
A Brahmin who seeks his own welfare should follow the path of the gentlemen and should always take food after feeding the guests and the people who are to be fed. He should follow the path prescribed by the Vedas and behave in the best manner. ॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥