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mahabharat 13.148.54: भामिनी! ब्राह्मण क्षेत्र संसार का एक महान क्षेत्र है। अन्य क्षेत्रों की तुलना में इसकी विशेषता यह है कि यह पैरों वाला एक गतिशील खेत है। इस क्षेत्र में बोया गया बीज परलोक के लिए जीविका का साधन बनकर खेती बन जाता है। 54॥   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.54 
ब्राह्मणोऽपि महत् क्षेत्रं लोके चरति पादवत्।
यत् तत्र बीजं वपति सा कृषि: प्रेत्य भाविनि॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
भामिनी! ब्राह्मण क्षेत्र संसार का एक महान क्षेत्र है। अन्य क्षेत्रों की तुलना में इसकी विशेषता यह है कि यह पैरों वाला एक गतिशील खेत है। इस क्षेत्र में बोया गया बीज परलोक के लिए जीविका का साधन बनकर खेती बन जाता है। 54॥
 
Bhamini! Brahmin is a great area in the world. Compared to other areas, its specialty is that it is a mobile farm with legs. The seed sown in this field turns into farming as a means of livelihood for the next world. 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)