Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.148.52: सुश्रोणि! ब्रह्म का स्वरूप सर्वत्र एक जैसा है। मेरा मानना है कि जो उस निर्गुण और शुद्ध ब्रह्म को जानता है, वही सच्चा ब्राह्मण है। | mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्म: स्वभाव: सुश्रोणि सम: सर्वत्र मे मति:।
निर्गुणं निर्मलं ब्रह्म यत्र तिष्ठति स द्विज:॥ ५२॥
अनुवाद
सुश्रोणि! ब्रह्म का स्वरूप सर्वत्र एक जैसा है। मेरा मानना है कि जो उस निर्गुण और शुद्ध ब्रह्म को जानता है, वही सच्चा ब्राह्मण है।
Sushroni! The nature of Brahma is the same everywhere. I believe that the one who has the knowledge of that attributeless and pure Brahma is truly a Brahmin. 52.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥