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mahabharat 13.148.50: न तो लिंग, न संस्कृति, न शास्त्रज्ञान, न संतान, ये ही ब्राह्मणत्व प्राप्ति के एकमात्र कारण हैं। सदाचार ही ब्राह्मणत्व का मुख्य कारण है ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.50 
न योनिर्नापि संस्कारो न श्रुतं न च संतति:।
कारणानि द्विजत्वस्य वृत्तमेव तु कारणम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
न तो लिंग, न संस्कृति, न शास्त्रज्ञान, न संतान, ये ही ब्राह्मणत्व प्राप्ति के एकमात्र कारण हैं। सदाचार ही ब्राह्मणत्व का मुख्य कारण है ॥50॥
 
Neither sex, nor culture, nor knowledge of scriptures, nor progeny are the only reason for attaining Brahminhood. Good conduct is the main reason for Brahmanism. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)