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श्लोक  13.148.49 
स्वभाव: कर्म च शुभं यत्र शूद्रेऽपि तिष्ठति।
विशिष्ट: स द्विजातेर्वै विज्ञेय इति मे मति:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
मेरे मत में यदि शूद्र का स्वभाव और कर्म अच्छे हैं तो वह द्विज (द्वितीय जाति) से भी श्रेष्ठ माना जाने योग्य है।
 
In my opinion, if the nature and deeds of a Shudra are good, then he is worthy of being considered even better than a Dwija (dwitiya caste). 49.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)