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ब्राह्मणो वाप्यसद्वृत्त: सर्वसंकरभोजन:।
ब्राह्मण्यं स समुत्सृज्य शूद्रो भवति तादृश:॥ ४७॥
अनुवाद
यदि ब्राह्मण आचारहीन होकर वर्णसंकर लोगों के घर भोजन करता है, तो वह अपना ब्राह्मणत्व त्यागकर उन्हीं के समान शूद्र हो जाता है ॥47॥
If a Brahmin becomes immoral and takes food at the houses of people belonging to mixed castes, then he gives up his brahminhood and becomes a shudra like him. ॥ 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥