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mahabharat 13.148.46: हे देवि! इन कर्मफलों के प्रभाव से नीच कुल और हीन कुल में जन्मा शूद्र भी अगले जन्म में शास्त्रों का ज्ञान और उत्तम संस्कारों वाला ब्राह्मण बन जाता है। 46॥   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  13.148.46 
एतै: कर्मफलैर्देवि न्यूनजातिकुलोद्भव:।
शूद्रोऽप्यागमसम्पन्नो द्विजो भवति संस्कृत:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
हे देवि! इन कर्मफलों के प्रभाव से नीच कुल और हीन कुल में जन्मा शूद्र भी अगले जन्म में शास्त्रों का ज्ञान और उत्तम संस्कारों वाला ब्राह्मण बन जाता है। 46॥
 
Goddess! Due to the influence of these karmic results, even a Shudra born in a low caste and inferior family becomes a Brahmin with knowledge of scriptures and good values ​​in his next birth. 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)