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mahabharat 13.148.4: हे प्रभु! कौन-सा कर्म करने से ब्राह्मण शूद्र जन्म लेता है, अथवा कौन-सा कर्म करने से क्षत्रिय शूद्र बनता है?   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.4 
केन वा कर्मणा विप्र: शूद्रयोनौ प्रजायते।
क्षत्रिय: शूद्रतामेति केन वा कर्मणा विभो॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! कौन-सा कर्म करने से ब्राह्मण शूद्र जन्म लेता है, अथवा कौन-सा कर्म करने से क्षत्रिय शूद्र बनता है?
 
Lord! By doing which deed does a Brahmin take birth as a Shudra or by which deed does a Kshatriya become a Shudra? 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)