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mahabharat 13.148.38: अपराधी को धर्मानुसार दण्ड दो। दण्ड का त्याग मत करो। प्रजा को धर्म का उपदेश दो। राजकार्य के लिए नियम और नियमों से बंधे रहो। प्रजा की आय का छठा भाग वस्तु के रूप में ग्रहण करो ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.38 
धर्मदण्डो न निर्दण्डो धर्मकार्यानुशासक:।
यन्त्रित: कार्यकरणै: षड्भागकृतलक्षण:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
अपराधी को धर्मानुसार दण्ड दो। दण्ड का त्याग मत करो। प्रजा को धर्म का उपदेश दो। राजकार्य के लिए नियम और नियमों से बंधे रहो। प्रजा की आय का छठा भाग वस्तु के रूप में ग्रहण करो ॥38॥
 
Punish the criminal according to Dharma. Do not renounce punishment. Preach Dharma to the people. Be bound by rules and regulations for carrying out the state affairs. Take one-sixth of the income of the people in kind. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)