Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.148.35-37: जो वैश्य क्षत्रिय कुल में उत्पन्न होकर जन्म से ही क्षत्रिय संस्कारों से युक्त और उपनयन संस्कार के पश्चात ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने के लिए तत्पर रहता है, वह परम प्रतिष्ठित ब्राह्मण होता है। वह दान देता है, प्रचुर दक्षिणा सहित समृद्ध यज्ञों में भगवान की पूजा करता है, वेदों का अध्ययन करता है, स्वर्ग की कामना करता है और सदैव तीनों प्रकार की अग्नियों का आश्रय लेकर उनकी पूजा करता है, दुःखी और पीड़ित लोगों का भरण-पोषण करता है, प्रतिदिन धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करता है, स्वयं सत्यवादी और सत्य का आचरण करता है तथा अपने दर्शन मात्र से ही सबको प्रसन्न कर लेता है, वही श्रेष्ठ क्षत्रिय या राजा है। | mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो वैश्य क्षत्रिय कुल में उत्पन्न होकर जन्म से ही क्षत्रिय संस्कारों से युक्त और उपनयन संस्कार के पश्चात ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने के लिए तत्पर रहता है, वह परम प्रतिष्ठित ब्राह्मण होता है। वह दान देता है, प्रचुर दक्षिणा सहित समृद्ध यज्ञों में भगवान की पूजा करता है, वेदों का अध्ययन करता है, स्वर्ग की कामना करता है और सदैव तीनों प्रकार की अग्नियों का आश्रय लेकर उनकी पूजा करता है, दुःखी और पीड़ित लोगों का भरण-पोषण करता है, प्रतिदिन धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करता है, स्वयं सत्यवादी और सत्य का आचरण करता है तथा अपने दर्शन मात्र से ही सबको प्रसन्न कर लेता है, वही श्रेष्ठ क्षत्रिय या राजा है।
A Vaishya born in a Kshatriya family, endowed with Kshatriya rituals from birth, and ready to observe the vow of celibacy after Upanayana, becomes a highly respected Brahmin. He gives charity, worships God in prosperous sacrifices with ample dakshina, studies the Vedas, desires heaven and always takes refuge in the three types of fires and worships them, supports the sad and suffering people, takes care of his subjects righteously every day, himself is truthful and behaves truthfully and is pleasant to everyone just by his mere sight, he is the best Kshatriya or king.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥