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mahabharat 13.148.25: जो गुरु की शय्या पर सोता है, गुरु का द्रोही है और गुरु की निन्दा करने में रूचि रखता है, वह ब्राह्मण वेदों का विद्वान् होकर भी ब्रह्मयोनि से नीचे गिर जाता है ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.25 
गुरुतल्पी गुरुद्रोही गुरुकुत्सारतिश्च य:।
ब्रह्मविच्चापि पतति ब्राह्मणो ब्रह्मयोनित:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जो गुरु की शय्या पर सोता है, गुरु का द्रोही है और गुरु की निन्दा करने में रूचि रखता है, वह ब्राह्मण वेदों का विद्वान् होकर भी ब्रह्मयोनि से नीचे गिर जाता है ॥25॥
 
The one who sleeps on the Guru's bed, is a traitor to the Guru and is fond of blaspheming the Guru, that Brahmin, despite being a scholar of the Vedas, falls down from Brahmayoni. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)