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mahabharat 13.148.23-24: शराबी, ब्राह्मण का हत्यारा, नीच, चोर, व्रतभंजक, अशुद्ध, ठीक से अध्ययन न करने वाला, पापी, लोभी, पाखंडी, बेईमान, व्रत न करने वाला, शूद्रादि स्त्री का पति, कुण्डाशी (अपने पति के जीवित रहते हुए उत्पन्न हुए कुपुत्र के घर में भोजन करने वाला अथवा केवल पके हुए बर्तन में भोजन करने वाला), सोमरस बेचने वाला और नीच ब्राह्मण की सेवा करने वाला, ब्राह्मणी के गर्भ से ही भ्रष्ट हो जाता है॥23-24॥   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.23-24 
सुरापो ब्रह्महा क्षुद्रश्चोरो भग्नव्रतोऽशुचि:।
स्वाध्यायवर्जित: पापो लुब्धो नैकृतिक: शठ:॥ २३॥
अव्रती वृषलीभर्ता कुण्डाशी सोमविक्रयी।
निहीनसेवी विप्रो हि पतति ब्रह्मयोनित:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
शराबी, ब्राह्मण का हत्यारा, नीच, चोर, व्रतभंजक, अशुद्ध, ठीक से अध्ययन न करने वाला, पापी, लोभी, पाखंडी, बेईमान, व्रत न करने वाला, शूद्रादि स्त्री का पति, कुण्डाशी (अपने पति के जीवित रहते हुए उत्पन्न हुए कुपुत्र के घर में भोजन करने वाला अथवा केवल पके हुए बर्तन में भोजन करने वाला), सोमरस बेचने वाला और नीच ब्राह्मण की सेवा करने वाला, ब्राह्मणी के गर्भ से ही भ्रष्ट हो जाता है॥23-24॥
 
A drunkard, a killer of a brahmin, a mean person, a thief, one who breaks fasts, an impure person, one who does not study properly, a sinner, avaricious, a hypocrite, a dishonest person, one who does not observe fasts, the husband of a woman belonging to the Shudra caste, a Kundaashi (one who eats in the house of an illegitimate son born to his husband while he is alive or one who eats only in a cooked vessel), a seller of Soma juice and one who serves a lowly Brahmin, becomes corrupt from the womb of a Brahmin.॥23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)