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mahabharat 13.148.20: उदर में स्थित शूद्रान्न का अंश शेष रहने के कारण ब्राह्मण ब्रह्मलोक से वंचित होकर शूद्रभाव को प्राप्त होता है; अन्यथा विचार करने की आवश्यकता नहीं है ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.20 
तेन शूद्रान्नशेषेण ब्रह्मस्थानादपाकृत:।
ब्राह्मण: शूद्रतामेति नास्ति तत्र विचारणा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उदर में स्थित शूद्रान्न का अंश शेष रहने के कारण ब्राह्मण ब्रह्मलोक से वंचित होकर शूद्रभाव को प्राप्त होता है; अन्यथा विचार करने की आवश्यकता नहीं है ॥20॥
 
Due to the remaining part of Shudraanna situated in the abdomen, the Brahmin is deprived of Brahmalok and attains Shudrabhava; There is no need to think otherwise. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)