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mahabharat 13.148.19: जो ब्राह्मण शूद्र का अन्न पेट में रखकर मरता है, चाहे वह अग्निहोत्री हो या यज्ञकर्ता, उसे शूद्र की योनि में जन्म लेना पड़ता है॥19॥   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.19 
शूद्रान्नेनावशेषेण जठरे यो म्रियेद् द्विज:।
आहिताग्निस्तथा यज्वा स शूद्रगतिभाग् भवेत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण शूद्र का अन्न पेट में रखकर मरता है, चाहे वह अग्निहोत्री हो या यज्ञकर्ता, उसे शूद्र की योनि में जन्म लेना पड़ता है॥19॥
 
A Brahmin who dies with food belonging to a Shudra in his stomach, even if he was an Agnihotri or a sacrificer, has to take birth in the womb of a Shudra.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)