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mahabharat 13.148.18: देवताओं और महापुरुषों ने शूद्रों के भोजन की सदैव निंदा की है। इस विषय में मेरा विश्वास है कि पितामह ब्रह्माजी के मुख से निकले वचन प्रमाण देते हैं। 18॥   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.18 
शूद्रान्नं गर्हितं देवि सदा देवैर्महात्मभि:।
पितामहमुखोत्सृष्टं प्रमाणमिति मे मति:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
देवताओं और महापुरुषों ने शूद्रों के भोजन की सदैव निंदा की है। इस विषय में मेरा विश्वास है कि पितामह ब्रह्माजी के मुख से निकले वचन प्रमाण देते हैं। 18॥
 
Gods and great men have always condemned the food of Shudra. In this matter, I believe that there is evidence from the words of the mouth of Grandfather Brahmaji. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)