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mahabharat 13.148.17: देवी! उग्र स्वभाव वाले व्यक्ति का भोजन निंदनीय माना गया है। किसी भी समुदाय, श्राद्ध, जनानाशौच, दुष्ट पुरुष या शूद्र का भोजन भी निषिद्ध है - उसे कभी नहीं खाना चाहिए। 17॥   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.17 
उग्रान्नं गर्हितं देवि गणान्नं श्राद्धसूतकम्।
दुष्टान्नं नैव भोक्तव्यं शूद्रान्नं नैव कर्हिचित्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
देवी! उग्र स्वभाव वाले व्यक्ति का भोजन निंदनीय माना गया है। किसी भी समुदाय, श्राद्ध, जनानाशौच, दुष्ट पुरुष या शूद्र का भोजन भी निषिद्ध है - उसे कभी नहीं खाना चाहिए। 17॥
 
Goddess! The food of a person of aggressive nature is considered condemnable. The food of any community, Shraddha, Jananasaucha, evil man or Shudra is also prohibited - it should never be eaten. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)