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mahabharat 13.148.16: देवि! ब्रह्माजी ने एक बात और बताई है - धर्म की इच्छा रखने वाले सत्पुरुषों को जीवन भर केवल आध्यात्मिक तत्त्वों का ही सेवन करना चाहिए। 16॥   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.16 
इदं चैवापरं देवि ब्रह्मणा समुदाहृतम्।
अध्यात्मं नैष्ठिकं सद्भिर्धर्मकामैर्निषेव्यते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
देवि! ब्रह्माजी ने एक बात और बताई है - धर्म की इच्छा रखने वाले सत्पुरुषों को जीवन भर केवल आध्यात्मिक तत्त्वों का ही सेवन करना चाहिए। 16॥
 
Goddess! Lord Brahma has told this one more thing - good men who desire religion should consume only spiritual elements throughout their life. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)