Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.148.15: जो मनुष्य अपने कुल के धर्म का पालन करके आत्मज्ञान प्राप्त करता है, ज्ञान और बुद्धि से युक्त है, शुद्ध है, धर्म को जानता है और धर्म में ही तत्पर रहता है, वही धर्म का सच्चा फल भोगता है॥ 15॥ | mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यस्तु बुद्ध: स्वधर्मेण ज्ञानविज्ञानवान् शुचि:।
धर्मज्ञो धर्मनिरत: स धर्मफलमश्नुते॥ १५॥
अनुवाद
जो मनुष्य अपने कुल के धर्म का पालन करके आत्मज्ञान प्राप्त करता है, ज्ञान और बुद्धि से युक्त है, शुद्ध है, धर्म को जानता है और धर्म में ही तत्पर रहता है, वही धर्म का सच्चा फल भोगता है॥ 15॥
He who attains enlightenment by following the dharma of his caste and is endowed with knowledge and wisdom, is pure and knowledgeable about dharma and remains devoted to dharma, he alone enjoys the true fruits of dharma.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥