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mahabharat 13.148.1: पार्वतीजी ने पूछा- हे दक्ष के यज्ञ का विध्वंस करने वाले, भगदेवता की आँख फोड़ने वाले और पूषा के दाँत तोड़ने वाले भगवान त्रिलोचन! मेरे मन में बड़ा संदेह है॥1॥   |   mahabharat अध्याय 13.148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.148.1 
उमोवाच
भगवन् भगनेत्रघ्न पूष्णो दन्तनिपातन।
दक्षक्रतुहर त्र्यक्ष संशयो मे महानयम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
पार्वतीजी ने पूछा- हे दक्ष के यज्ञ का विध्वंस करने वाले, भगदेवता की आँख फोड़ने वाले और पूषा के दाँत तोड़ने वाले भगवान त्रिलोचन! मेरे मन में बड़ा संदेह है॥1॥
 
Parvatiji asked- O Lord Trilochan, the destroyer of the sacrifice of Daksha, who gouged out the eye of Bhagdevata and broke the teeth of Pusha! I have a big doubt in my mind. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)