श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक d34
 
 
श्लोक  13.147.d34 
वराप्सरोभि: संयुक्ताश्चिरकालमनिन्दिते।
एतत् ते कथितं देवि भूय: श्रोतुुं किमिच्छसि॥
 
 
अनुवाद
सती साध्वी देवी! वे श्रेष्ठ अप्सराओं के साथ दीर्घकाल तक रहकर सुख का अनुभव करते हैं। यह वैखानसों का धर्म है जो मैंने तुमसे कहा है, अब और क्या सुनना चाहती हो?
 
Sati Sadhvi Devi! They experience happiness by staying with the best Apsaras for a long time. This is the religion of the Vaikhanasas that I have told you, what else do you want to hear?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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