श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक d21
 
 
श्लोक  13.147.d21 
श्रीमहेश्वर उवाच
एतत् ते कथयिष्यामि शृणु शाकटिकं शुभे॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले- शुभ! मैं तुमसे यह कह रहा हूँ। चक्रचारी या शाकटिका मुनियों का धर्म सुनो।
 
Shri Maheshwar said- Shubh! I am telling you this. Listen to the religion of Chakrachari or Shakatika sages.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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