श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  13.147.44 
आहारनियमं कृत्वा मुनिर्द्वादशवार्षिकम्।
मरुं संसाध्य यत्नेन राजा भवति पार्थिव:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जो मुनि बारह वर्ष तक आहार पर संयम रखता है और मरुभूमि में अर्थात् जल का भी त्याग करके तपस्या करता है, वह भी इस पृथ्वी का राजा हो जाता है ॥ 44॥
 
A sage who controls his food intake for twelve years and performs austerities in the desert i.e. by giving up even water, he also becomes the king of this earth. ॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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