श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.147.4 
श्रीमहेश्वर उवाच
वानप्रस्थेषु यो धर्मस्तं मे शृणु समाहिता।
श्रुत्वा चैकमना देवि धर्मबुद्धिपरा भव॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भगवान महेश्वर बोले - देवि! गृहस्थ और वानप्रस्थों के धर्म (कर्तव्य) के विषय में मुझसे एकाग्रचित्त होकर सुनो। इसे सुनने के बाद अपने मन को एकाग्र करो और अपनी बुद्धि को धर्म में लगाओ।
 
Lord Maheshwara said - Goddess! Listen to me with full concentration about the Dharma (duty) of the householders and Vanaprasthas. After listening to it, concentrate your mind and focus your intellect on Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)