श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  13.147.37 
एतन्मे संशयं देव तपश्चर्याऽऽश्रितं शुभम्।
शंस सर्वमशेषेण त्र्यक्ष त्रिपुरनाशन॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे देवा! हे त्रिपुर्नाशन त्रिलोचन! तप पर निर्भर शुभ फल के विषय में मेरे मन में यह संदेह है। कृपया इन सभी संदेहों का पूर्ण समाधान दीजिए ॥37॥
 
O Deva! O Tripurnashan Trilochan! I have this doubt regarding the auspicious results dependent on penance. Please give me a complete answer to all these doubts. ॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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