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श्लोक 13.147.30  |
आर्जवं धर्ममित्याहुरधर्मो जिह्म उच्यते।
आर्जवेनेह संयुक्तो नरो धर्मेण युज्यते॥ ३०॥ |
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| अनुवाद |
| सरलता को धर्म और कुटिलता को अधर्म कहते हैं। सरलता से युक्त मनुष्य ही यहाँ धर्म का फल भोगता है ॥30॥ |
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| Simplicity is called Dharma and crookedness is called Adharma. Only a man endowed with simplicity enjoys the fruits of Dharma here. ॥ 30॥ |
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