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mahabharat 13.147.18: जो मुनिगण सत्य धर्म का आश्रय लेकर सिद्ध हो जाते हैं, वे महान पुण्यमय ब्रह्मलोक और सनातन सोमलोक को जाते हैं ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.147.18 
ब्रह्मलोकं महापुण्यं सोमलोकं च शाश्वतम्।
गच्छन्ति मुनय: सिद्धा: सत्यधर्मव्यपाश्रया:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जो मुनिगण सत्य धर्म का आश्रय लेकर सिद्ध हो जाते हैं, वे महान पुण्यमय ब्रह्मलोक और सनातन सोमलोक को जाते हैं ॥18॥
 
Those sages who take shelter of the true religion and become perfect, hence go to the great virtuous Brahmalok and the eternal Somlok. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)