श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.147.16 
विमुक्ता दारसंयोगैर्विमुक्ता: सर्वसंकरै:।
विमुक्ता: सर्वपापैश्च चरन्ति मुनयो वने॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वानप्रस्थ काल के ऋषिगण स्त्रियों के संग, सब प्रकार के उत्पातों और सब पापों से दूर रहकर वनों में विचरण करते हैं ॥16॥
 
The sages of the Vanaprastha period roam about in the forests, staying away from the company of women, all kinds of mischiefs and all sins. ॥16॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd