श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.147.15 
अष्टमीयज्ञपरता चातुर्मास्यनिषेवणम्।
पौर्णमासादयो यज्ञा नित्ययज्ञस्तथैव च॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अष्टमी तिथि को किए जाने वाले अष्टक श्राद्ध यज्ञ के लिए तैयार रहना, चातुर्मास्य व्रत का पालन करना, पूर्णमास तथा दारूढ़ यज्ञ और नित्ययज्ञ का अनुष्ठान करना वानप्रस्थ मुनि का धर्म है। 15॥
 
Being ready for the Ashtaka Shraddha Yagya performed on Ashtami Tithi, observing Chaturmasya fast, performing the rituals of Purnamas and Darudha Yagya and Nityayagya is the religion of Vanaprastha Munika. 15॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd