श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक d93
 
 
श्लोक  13.146.d93 
शरीरमेकं दम्पत्योर्विधात्रा पूर्वनिर्मितम्॥
तस्मात् स्वदारनिरतो ब्रह्मचारी विधीयते।
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में विधाता ने पति और पत्नी को एक शरीर के रूप में बनाया था; इसलिए जो पुरुष अपनी पत्नी के प्रति समर्पित होता है, उसे ब्रह्मचारी माना जाता है।
 
In ancient times, the Creator had created husband and wife as one body; hence a man who is devoted to his own wife is considered a celibate.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)