Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.146.d86-d91: श्री महेश्वर ने कहा- देवताओं और अतिथियों की सेवा करो, बड़ों और बुजुर्गों का अभिवादन करो, किसी भी जीव को कष्ट न दो, लोभ का त्याग करो, सत्य बोलो, ब्रह्मचर्य, शरणागतों से प्रेम करो, स्वच्छता रखो, पहले बात करो, उपकार करने वाले के प्रति कृतज्ञ रहो, चुगली न करो, सदैव धार्मिक रहो, दिन में दो बार स्नान करो, देवताओं और पितरों का पूजन करो, प्रतिदिन गायों को अन्न और घास दो, अतिथियों को यथायोग्य भोजन दो, दीपक जलाओ, ठहरने का स्थान दो, उनके लिए जल और जल की व्यवस्था करो, पंचमी, षष्ठी, द्वादशी, अष्टमी, चतुर्थी और पूर्णिमा को सदैव ब्रह्मचर्य का पालन करो, मूँछ न मुड़वाओ, सिर पर तेल लगाओ, नेत्रों का रंग लगाओ, इन दिनों में दांत मांजो और धोओ। इन नियमों और विनियमों का पालन करने वालों के घर में लक्ष्मी निवास करती हैं। | mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीमहेश्वर उवाच
देवतातिथिशुश्रूषा गुरुवृद्धाभिवादनम्॥
अहिंसा सर्वभूतानामलोभ: सत्यसंधता।
ब्रह्मचर्यं शरण्यत्वं शौचं पूर्वाभिभाषणम्॥
कृतज्ञत्वमपैशुन्यं सततं धर्मशीलता।
दिने द्विरभिषेकं च पितृदैवतपूजनम्॥
गवाह्निकप्रदानं च संविभागोऽतिथिष्वपि।
दीपं प्रतिश्रयं चैव दद्यात् पाद्यासनं तथा॥
पञ्चमेऽहनि षष्ठे वा द्वादशेऽप्यष्टमेऽपि वा।
चतुर्दशे पञ्चदशे ब्रह्मचारी सदा भवेत् ॥
श्मश्रुकर्म शिरोऽभ्यङ्गमञ्जनं दन्तधावनम्।
नैतेष्वहस्सु कुर्वीत तेषु लक्ष्मी: प्रतिष्ठिता॥
अनुवाद
श्री महेश्वर ने कहा- देवताओं और अतिथियों की सेवा करो, बड़ों और बुजुर्गों का अभिवादन करो, किसी भी जीव को कष्ट न दो, लोभ का त्याग करो, सत्य बोलो, ब्रह्मचर्य, शरणागतों से प्रेम करो, स्वच्छता रखो, पहले बात करो, उपकार करने वाले के प्रति कृतज्ञ रहो, चुगली न करो, सदैव धार्मिक रहो, दिन में दो बार स्नान करो, देवताओं और पितरों का पूजन करो, प्रतिदिन गायों को अन्न और घास दो, अतिथियों को यथायोग्य भोजन दो, दीपक जलाओ, ठहरने का स्थान दो, उनके लिए जल और जल की व्यवस्था करो, पंचमी, षष्ठी, द्वादशी, अष्टमी, चतुर्थी और पूर्णिमा को सदैव ब्रह्मचर्य का पालन करो, मूँछ न मुड़वाओ, सिर पर तेल लगाओ, नेत्रों का रंग लगाओ, इन दिनों में दांत मांजो और धोओ। इन नियमों और विनियमों का पालन करने वालों के घर में लक्ष्मी निवास करती हैं।
Shri Maheshwar said- serve the gods and guests, greet the elders and elders, do not harm any living being, give up greed, be truthful, celibacy, love for those who surrender, cleanliness, talk first, be grateful to the benefactor, do not backbite, always be religious, bathe twice a day, worship the gods and ancestors, give food grains and grass to cows every day, give food to the guests in a proportionate manner, light a lamp, place to stay, provide water and water for them, always observe celibacy on the fifth day, sixth day, twelfth day, eighth day, fourth day and full moon day, do not shave the moustache, apply oil on the head, apply eyeliner, brush teeth and wash teeth on these days. Lakshmi resides in the house of those who follow these rules and regulations.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥