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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण
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श्लोक d85
श्लोक
13.146.d85
उमोवाच
मातापितृवियुक्तानां का चर्या गृहमेधिनाम्॥
विधवानां च नारीणां भवानेतद् ब्रवीतु मे।
अनुवाद
उन्होंने पूछा, "जिन गृहस्थों के माता-पिता नहीं हैं या जो विधवा हैं, उनकी जीवनशैली कैसी होनी चाहिए? कृपया मुझे यह बताइए।"
He asked- What should be the lifestyle of those householders who do not have parents or widows? Please tell me this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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