Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.146.d81-d82: श्री महेश्वर बोले - देवी! गृहस्थ जीवन का मूल और फल, यह उत्तम धर्म अपने चारों चरणों में सदैव विद्यमान रहता है, वररोहे! जैसे दही से घी निकाला जाता है, वैसे ही मैं तुम्हें समस्त धर्मों का सार बता रहा हूँ। धर्मचारिणी! सुनो। | mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्री महेश्वर बोले - देवी! गृहस्थ जीवन का मूल और फल, यह उत्तम धर्म अपने चारों चरणों में सदैव विद्यमान रहता है, वररोहे! जैसे दही से घी निकाला जाता है, वैसे ही मैं तुम्हें समस्त धर्मों का सार बता रहा हूँ। धर्मचारिणी! सुनो।
Shri Maheshwar said - Devi! The root and fruit of the household life, this great religion is always present in all its four feet, Vararohe! Just like ghee is extracted from curd, in the same way I am telling you about the essence of all religions. Dharmacharini! Listen.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥