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mahabharat 13.146.d8: प्रिये! उसके अनुसार घोर तपस्या करते समय कालान्तर में ऋषि के सिर पर एक हड्डी अटक गई। उसे सिर पर रखकर उन्होंने पूर्ववत् अपनी तपस्या जारी रखी।   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.146.d8 
तथा तस्य तपो घोरं चरत: कालपर्ययात्॥
वल्मीकं पुनरुद्भूतं तस्यैव शिरसि प्रिये।
धरमाणश्च तत् सर्वं तपश्चर्यां तथाकरोत्।
 
 
अनुवाद
प्रिये! उसके अनुसार घोर तपस्या करते समय कालान्तर में ऋषि के सिर पर एक हड्डी अटक गई। उसे सिर पर रखकर उन्होंने पूर्ववत् अपनी तपस्या जारी रखी।
 
Dear! As per that, while performing severe penance, over time a bone got stuck on the sage's head. Keeping all that on his head, he continued with his penance as before.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)