श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक d71
 
 
श्लोक  13.146.d71 
तस्मात् सौम्येन चित्तेन दातव्यं देवि सर्वथा।
सौम्यचित्तस्तु यो दद्यात् तद्धि दानमनुत्तमम्॥
 
 
अनुवाद
अतः देवी! दान शुद्ध मन से देना चाहिए; क्योंकि जो कोमल मन से दान देता है, उसका दान सर्वश्रेष्ठ होता है।
 
So Devi! Donation should be given with a pure heart; Because the one who gives charity with a gentle mind, his donation is the best.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)