श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक d67
 
 
श्लोक  13.146.d67 
बुभुक्षितं पिपासार्तमतिथिं श्रान्तमागतम्।
अर्चयन्ति वरारोहे तेषामपि फलं महत् ॥
 
 
अनुवाद
वररोहे! जो भूखे-प्यासे और थके हुए अतिथियों की सेवा और पूजा करते हैं, उन्हें भी महान फल की प्राप्ति होती है।
 
Vararohe! Those who serve and worship guests who are hungry and thirsty and tired, also achieve great rewards.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)